अँधेरे से घिरा हुआ मैं
आभार करता हूँ उन अदृश्य देवताओं का -
जिनकी कृपा से मिली है मुझे -
मेरी यह अजेय आत्मा.
अनगिनत विपत्तियों के -
क्रूर पंजों में जकड़ा जाने पर भी -
मैं न कभी विचलित हुआ -
और न ही रोया दहाड़ मार कर
रक्तरंजित तो हुआ मेरा शीश,
किन्तु झुका नहीं -
कभी भी.
क्रोध और अश्रुओं से भरी इस दुनिया में -
सर्वत्र व्याप्त है भय का अंधकार -
किन्तु निरंतर सामने आती आपदाओं ने -
मुझे सदैव निर्भीक पाया है -
और ऐसा ही होता रहेगा -
आगे भी.
किंचित परवाह नहीं मुझे, कि -
कितना दुर्गम होगा मेरा रास्ता -
कितने दंड आदेशों से भरी होगी -
मेरी भाग्य कुंडली.
मुझे विश्वास है कि -
मैं स्वयं अपने भाग्य का स्वामी हूँ -
और नियंता भी -
अपनी अजेय आत्मा का!!
A sense transcreation of " VICTUS"

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